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मलखानसिंहभदौरिया:संघर्ष, परिवार,राजनीति और समाज सेवा की जीवंत गाथा

  • Sep 15, 2025
  • 3 min read

मलखान सिंह भदौरिया का जन्म 15 अप्रैल 1979 को मध्य प्रदेश के भिंड जिले के ग्राम डोंगरपुरा थाना बरोही में एक प्रतिष्ठित क्षत्रिय परिवार में हुआ। उनके दादा श्री साधू सिंह भदौरिया एक कृषक थे, जिन्होंने क्षेत्र में कई तालाब खुदवाए और गरीब बेटियों के विवाह में सहयोग दिया। यह परिवार खेती-किसानी से जुड़ा था, जो उनके जीवन की आधारशिला थी। उनके पिता श्री लालजी भदौरिया भी एक किसान थे, जिन्होंने वर्ष 1993 में भिंड नगर पालिका के वार्ड नंबर 7 से पार्षद पद का चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीते। उन्होंने अपने कार्यकाल में भिंड के 39 वार्डों में सर्वाधिक विकास कार्य करवाए और भिंड में एक लोकप्रिय पार्षद के रूप में अपनी छवि बनाई। उनके पिता पूर्व विधायक डॉक्टर राम लखन सिंह कुशवाहा के करीबी माने जाते थे। 1998 में श्री लालजी भदौरिया कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए, लेकिन 2002 में उन्होंने राजनीति को अलविदा कहकर खेती में पूरी तरह से लग गए। उन्होंने अपने गांव में एक पुस्तकालय भी बनवाया, जिससे शिक्षा और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा मिला।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

मलखान सिंह का बचपन ग्राम डोंगरपुरा में बीता, जहाँ उन्होंने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा गाँव के शासकीय स्कूल से प्राप्त की। वर्ष 1992 में ग्वालियर के रब्बानी बहाई स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। परिवार में आई विवादों के कारण वह भिंड शहर के सीता नगर में आ बसे। उन्होंने जनता कॉलेज भिंड से स्नातक की डिग्री प्राप्त की, बाद में मध्य प्रदेश भोज विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री हासिल की और अंततः जीवाजी विश्वविद्यालय से वर्ष 2015 में विधि की डिग्री भी प्राप्त की। इन शिक्षाओं ने उनकी सोच और प्रभाव को मजबूती दी।

राजनीतिक जीवन का आरंभ

मलखान सिंह ने वर्ष 2000 के आसपास भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में प्रवेश किया। उन्होंने राजनीति की शुरुआत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ की, जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में थी। उनके नेतृत्व और सहयोग से मलखान सिंह कांग्रेस में शामिल हुए। वर्ष 2004 में उन्होंने जिला युवा कांग्रेस में उपाध्यक्ष के रूप में पद ग्रहण किया और युवा वर्ग के लिए कार्य किए। वे ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों, बिजली-पानी की समस्याओं, और अन्य सामाजिक मुद्दों पर जन आंदोलन का नेतृत्व करने लगे। तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मीनाक्षी नटराजन ने उनकी सक्रियता की खुले दिल से प्रशंसा की। वर्ष 2017 में उन्हें किसान कांग्रेस मध्य प्रदेश का प्रदेश महासचिव नियुक्त किया गया।

पारिवारिक संघर्ष और कठिन दौर

मलखान सिंह और उनके परिवार ने कई बार जीवन की कठिनाइयों का सामना किया। वर्ष 2007-08 में परिवार में एक पुरानी दुश्मनी ने एक गंभीर मोड़ लिया, जिससे उन्हें अपने गांव को छोड़कर भिंड के सीता नगर में बसना पड़ा। इसके दौरान परिवार के सदस्यों पर एक हत्या प्रकरण का दोष लगाकर उन्हें जेल भेज दिया गया। यह मुकदमा राजनीतिक दबावों के तहत कई बार बढ़ा-चढ़ा कर प्रस्तुत किया गया। मलखान सिंह और उनके परिवार के कई सदस्य जेल में रहे और कठिनाइयों का सामना किया। वर्ष 2017 में जेल में रहते हुए उनके परिवार के सदस्यों ने रक्षाबंधन के दिन 42 वर्षों से चली आ रही पारिवारिक दुश्मनी को समझौते द्वारा समाप्त किया। इस घटना ने पूरे भिंड जिले को स्तब्ध कर दिया और सभी उपस्थित लोग भावुक हो उठे, जेल के अधिकारियों ने भी अपने आंसू नहीं रोके। यह अनूठा और भावपूर्ण पुनर्मिलन भिंड जिले में शांति और सौहार्द्र का प्रतीक बना।

व्यक्तित्व क्षमता और नेतृत्व

मलखान सिंह भदौरिया एक प्रखर वक्ता हैं, जिनके भाषणों में जनता को एकजुट करने और प्रेरित करने की विशेष शक्ति है। उनका कहना है कि यह शक्ति प्रभु श्रीराम जी की कृपा से प्राप्त हुई है, जो उन्हें लगातार प्रेरित करती रहती है। वे अपने क्षेत्र के किसानों, गरीबों और समाज के अन्य वंचित वर्गों के हित में लगातार संघर्षरत हैं। उनके वक्तव्यों की स्पष्टता और प्रभावशीलता के कारण उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने गंभीरता से लिया और सार्वजनिक स्तर पर सराहा।

वर्तमान और सामाजिक योगदान

आज भी मलखान सिंह राजनीति में सक्रिय हैं और अपने क्षेत्र के विकास, किसानों के कल्याण, और समाज सेवा के लिए काम कर रहे हैं। उनके परिवार की पत्नी ललिता राजपूत ग्राम पंचायत सुनगयाई की सरपंच हैं, जिन्होंने महिलाओं को आरक्षित करके पंचायत का स्वरूप बदल दिया है और वहां व्यापक विकास कार्य कर रही हैं। मलखान सिंह के लिए परिवार, सम्मान, और समाजसेवा सर्वोपरि हैं।


 
 
 

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