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राष्ट्र निर्माण में गुरुओं की अमूल्य भूमिका-मलखानसिह भदौरिया कांग्रेस नेता का भाषण

  • Sep 15, 2025
  • 3 min read

शिक्षक दिवस : राष्ट्र निर्माण में गुरुओं की अमूल्य भूमिकाशिक्षक दिवस केवल एक औपचारिक अवसर नहीं है, बल्कि यह दिन हमें शिक्षा और शिक्षक के महत्व का स्मरण कराता है। भार

त की महान परंपरा में गुरु को ईश्वर से भी उच्च स्थान दिया गया है। गुरुओं के योगदान को सम्मानित करने हेतु प्रत्येक वर्ष 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है, जो हमारे द्वितीय राष्ट्रपति और महान शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के अवसर पर पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है।शिक्षक का महत्व केवल किताबों तक सीमित नहीं होता। शिक्षक समाज को सही दिशा देते हैं, संस्कारों का संचार करते हैं और विद्यार्थियों में छुपी संभावनाओं को निखार कर उन्हें राष्ट्र निर्माण के योग्य बनाते हैं। मेरा व्यक्तिगत अनुभव भी यही रहा है कि यदि किसी विद्यार्थी को जीवन में सही मार्ग मिलता है, तो उसमें शिक्षक का सबसे बड़ा योगदान होता है।आज का युग प्रतिस्पर्धा और तकनीक का है। मोबाइल, इंटरनेट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों ने शिक्षा की परिभाषा बदल दी है। लेकिन चाहे समय कितना भी बदल जाए, शिक्षक का महत्व कभी कम नहीं हो सकता। मशीनें ज्ञान दे सकती हैं परंतु मूल्य और संस्कार केवल एक शिक्षक ही दे सकता है।हमारे किसान समाज में तो शिक्षक का आकार और भी बड़ा हो जाता है। गाँव के विद्यालयों से ही भविष्य के डॉक्टर्स, इंजीनियर, नेता और किसान नेता निकलते हैं। इसलिए ग्रामीण शिक्षा को मजबूत करने के लिए शिक्षकों की संवेदनशीलता और परिश्रम बेहद जरूरी है। मेरा मानना है कि गाँव में पढ़ाने वाले शिक्षक किसी वीर सिपाही से कम नहीं होते, क्योंकि वे सीमित संसाधन और तमाम कठिनाइयों के बावजूद बच्चों के जीवन को रोशन करने का कार्य करते हैं।डॉ. राधाकृष्णन जी ने कहा था कि यदि सही मायनों में शिक्षक बनने का संकल्प हो, तो राष्ट्र की दिशा-बदल सकती है। यही कारण है कि भारत में शिक्षा को केवल नौकरी तक सीमित न करके जीवन मूल्यों और आदर्शों से जोड़ा गया है। जब बच्चे अपने शिक्षकों से प्रेरणा लेकर राष्ट्रहित के कार्यों में लगते हैं, तभी विकास की वास्तविक गंगा बहती है।आज हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का साधन न बन जाए। शिक्षा का असली उद्देश्य है—चरित्र निर्माण, समाज सेवा, जीवन मूल्य और राष्ट्र भक्ति। इस कार्य को जीवंत बनाने वाले शिक्षक वास्तव में राष्ट्र निर्माता होते हैं।एक किसान परिवार से जुड़ा होने के नाते मैं यह भलीभांति समझता हूँ कि जब गाँव का बच्चा शिक्षित होता है तो पूरे परिवार की तकदीर बदल जाती है। लेकिन इस परिवर्तन की धुरी शिक्षक ही होता है। गाँव के स्कूलों में सबकुछ सीमित होता है—न बड़ी इमारतें, न आधुनिक सुविधाएँ—लेकिन वहाँ के शिक्षक अपने कर्तव्यनिष्ठ प्रयासों से छात्रों को ऊँचाइयाँ प्रदान करते हैं। ऐसे शिक्षकों के प्रति पूरा राष्ट्र ऋणी है।आज के समय में हमें शिक्षा व्यवस्था में कई सुधारों की आवश्यकता है। शिक्षक दिवस का यह अवसर हमें याद दिलाता है कि शिक्षण केवल नौकरी नहीं बल्कि एक मिशन है। हमें अपने शिक्षकों को वे सम्मान, सुविधाएँ और संसाधन अवश्य देने चाहिए जिनके वे हकदार हैं। एक मजबूत और सक्षम शिक्षक ही एक सशक्त राष्ट्र बना सकता है।लोकतांत्रिक भारत में शिक्षा का प्रसार व्यापक हो, इसके लिए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हर वर्ग का बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाए। शिक्षक इस कड़ी के सबसे अहम अंग हैं। यदि उनसे जुड़े आर्थिक और सामाजिक प्रश्न हल कर दिए जाएँ तो वे और भी निष्ठा से अपने दायित्व निभा सकेंगे।हमारे जैसे लोकतंत्र में शिक्षक सिर्फ ज्ञान नहीं देते बल्कि लोकतांत्रिक मूल्य, समानता और भाईचारे का संदेश भी अपने विद्यार्थियों तक पहुँचाते हैं। यही लोकतांत्रिक संस्कार हमारे बच्चों को आगे चलकर अच्छे नागरिक बनाते हैं।आज के शिक्षक दिवस पर मेरा विनम्र आग्रह है कि हम समाज के हर उस गुरु को नमन करें, जो अपने शिष्य की प्रगति के लिए दिन-रात मेहनत करता है। चाहे वह गाँव के प्राथमिक विद्यालय का शिक्षक हो या किसी विश्वविद्यालय का प्राध्यापक—हर एक को समान रूप से मान और सम्मान मिलना चाहिए।हम सबको मिलकर शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति बनाना होगा। शिक्षक दिवस का यह अवसर हमें बताता है कि यदि शिक्षक संतुष्ट और प्रेरित होंगे, तो विद्यार्थी भी राष्ट्र की सेवा में समर्पित रहेंगे। यह परंपरा ही भारत की असली ताकत है।अंत में, मैं अपने जीवन के सभी शिक्षकों और मार्गदर्शकों को हृदय से प्रणाम करता हूँ। उनके आशीर्वाद और मार्गदर्शन ने ही मुझे समाज और राजनीति की राह में आगे बढ़ने की शक्ति दी। शिक्षक दिवस के इस पावन अवसर पर मैं सम्पूर्ण शिक्षकों को सम्मानपूर्वक नमन करता हूँ और राष्ट्र निर्माण के उनके योगदान को साष्टांग प्रणाम।जय हिंद, जय किसान— मलखान सिंह भदोरिया

पूर्व महासचिव, किसान कांग्रेस

 
 
 

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