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सत्य की सलाखों से वापिसी- मलखानसिंह की आत्मकथा

  • May 20, 2025
  • 3 min read

शीर्षक: “सत्य की सलाखों से वापसी: मलखान सिंह भदौरिया की आत्मगाथा”

प्राक्कथन

मैंने अन्याय सहा है, अपमान का विष पिया है, लेकिन कभी झूठ के आगे सिर नहीं झुकाया। यह आत्मकथा केवल मेरा जीवन नहीं, बल्कि उस संघर्षशील परिवार की कहानी है जिसने समाज की सेवा को धर्म माना और जिसकी सच्चाई को राजनीति ने, सत्ता ने, और व्यवस्था ने कुचलने की भरपूर कोशिश की। लेकिन समय, सच्चाई और ईश्वर—तीनों के न्याय का चक्र चलता है। और मैं आज उसी न्याय के विश्वास पर यह आत्मकथा लिख रहा हूँ।--


1. जड़ें: जहां से हम उगते हैं


भिंड जिले के एक छोटे से गांव डोंगरपुरा में जन्मे हम—लालजी सिंह भदौरिया का परिवार—ना तो किसी से द्वेष रखते थे, ना ही किसी से प्रतिस्पर्धा। मेरे पिता ने नगर पालिका से राजनीति की शुरुआत की और समाज की सच्ची सेवा की। उन्होंने भिंड जिले में एक अलग पहचान बनाई, लेकिन “उठाता ही कुटुंब”—उनके ही परिजन, उनके ही जाति-बिरादरी के लोग, उन्हें ऊपर उठने नहीं देना चाहते थे। वे भयभीत थे कि कहीं लालजी सिंह राजनीति में उनके बराबर या आगे न निकल जाएं।


हमारा परिवार धार्मिक, सांस्कृतिक और तांत्रिक परंपराओं से जुड़ा एक शांतिप्रिय परिवार था। वर्ष 2008 से पहले हमारी 300 बीघा ज़मीन पर समृद्ध खेती होती थी। मेरे भाई राकेश सिंह भदौरिया भारतीय सेना में सेवा दे चुके थे। मैं स्वयं राजनीति को समाज सेवा का साधन मानकर आगे बढ़ रहा था।-


2. दूषित राजनीति और दमन की शुरआत

लेकिन भिंड जिले की राजनीति एक दलदल है। यहां यदि आप सच्चाई के साथ आगे बढ़ते हैं तो आपको नीचे खींचने वालों की कमी नहीं रहती। मैं जिस तेज़ी से राजनीति में उभर रहा था, वह कुछ राजनीतिक घरानों को रास नहीं आया। समाज जानता है कि हम कोई "उतटाई" या "लड़ाकू" प्रवृत्ति के लोग नहीं थे। लेकिन हमें जानबूझकर उस संघर्ष में धकेला गया, जो हमारे जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा बन गया।


दूसरा पक्ष—चिम्मन सिंह भदौरिया का परिवार—जो अपने क्षेत्र में डकैतों को संरक्षण देता था, हथियारों की सप्लाई करता था, अपहरण कर डकैतों को सौंपता था—उसके साथ हमारा संघर्ष हुआ। यह टकराव हमारे द्वारा नहीं, बल्कि हालातों द्वारा थोपा गया था।

3. न्याय की आंखों पर पट्टी


प्रशासन, जो निष्पक्ष होना चाहिए था, वह राजनीतिक दबाव में आकर आंखें मूंदे रहा। जब हमने अपनी ही भूमि पर पुनः खेती करने की मांग की, सुरक्षा की अपील की—प्रशासन मौन हो गया। यह वही ज़मीन थी, जहां हमारा खून-पसीना मिला है, लेकिन आज वह बंजर पड़ी है, क्योंकि हम पर बार-बार खतरे मंडराते हैं। दूसरी ओर, वह परिवार जिसने अराजकता को बढ़ावा दिया, उसे "भला नागरिक" मान लिया गया।


हमने मांग की कि हमें निष्पक्षता मिले, लेकिन प्रशासन, राजनीति और कुछ जातिवादी मानसिकता वाले नेताओं ने हमारे विरोध में वातावरण रच दिया। मेरे परिवार को खतरनाक बताने का प्रयास हुआ, जबकि हम केवल न्याय चाहते थे, अधिकार चाहते थे।

4. वह जेल नहीं, वह तपस्या थी


मुझे जीवन में एक मुकाम पर जेल भेजा गया—एक ऐसे मामले में जिसमें सच्चाई पूरी तरह दूसरी थी। यह दंड मुझे मेरी बढ़ती लोकप्रियता के कारण मिला। मुझे रोकने के लिए झूठ को न्याय का नाम दिया गया। लेकिन मैंने जेल में समय को रोष में नहीं, आत्ममंथन में बदला। वहाँ मैंने समाज, राजनीति और इंसानियत की असलियत को करीब से देखा।


30 मई 2024 को जब मैं ज़मानत पर बाहर आया, तो यह मेरी पुनर्जन्म की घड़ी थी—अब मैं और भी सचेत था, और भी तैयार।-


5. आज का अन्याय, कल का इतिहास बनेगा


आज भी प्रशासन और कुछ नेता मुझे और मेरे परिवार को अपराधी की नज़र से देखते हैं। दूसरी ओर, जो वास्तविक अपराधी हैं, उन्हें खुलेआम संरक्षण दिया जा रहा है। यह भेदभाव नहीं तो और क्या है?


कुछ नेताओं को डर है कि कहीं मैं राजनीति में दोबारा सक्रिय होकर उनका गणित न बिगाड़ दूँ। वे मुझे जाति के नाम पर दबाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि मैं स्वयं ठाकुर समाज से हूँ और हमेशा समाज की एकता और प्रगति के लिए लड़ा हूँ।-


6. मेरी अंतिम प्रार्थना


मैंने कभी किसी का बुरा नहीं चाहा। मैंने केवल वही माँगा जो मेरा अधिकार था। यदि हमने कोई अन्याय किया है, तो हमें सज़ा मिले। लेकिन यदि हम निर्दोष हैं, तो ईश्वर निश्चित रूप से हमारा साथ देगा।


ईश्वर देख रहा है—कौन अत्याचार कर रहा है, कौन उसे सह रहा है। समय का न्याय सर्वश्रेष्ठ होता है। जो आज ऊँचे सिंहासनों पर बैठे हैं, वे कल इतिहास की कठघरे में होंगे। और तब सच्चाई की गूंज सबसे ऊँची होगी।



---उपसंहार

यह आत्मकथा सिर्फ मलखान सिंह की कहानी नहीं है, बल्कि उन लाखों लोगों की आवाज़ है जो राजनीति के दुष्चक्र, प्रशासन के पक्षपात और समाज की चुप्पी से पीड़ित हैं। यह आत्मकथा भविष्य के लिए एक सबक है—कि सच्चाई को दबाया जा सकता है, मिटाया नहीं जा सकता।

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[लेखक: मलखान सिंह भदौरिया]

पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष, मध्यप्रदेश किसान कांग्रेस

निवासी: डोंगरपुरा, जिला भिंड

 
 
 

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